Shani Dev Ki Aarti (शनि देव की आरती) - Gyan.Gurucool
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Shani Dev Ki Aarti: शनिवार का दिन शनि देव (Shani Dev) को समर्पित है। शनि देव (Shani Dev) को न्याय का देव कहते हैं। शनि देव (Shani Dev) कभी किसी के साथ अन्याय नहीं करते हैं। अगर आप शनिदोष से ग्रसित हैं या आप पर साढ़े साती चल रही है तो आपको शनि देव (Shani Dev) की नियमित पूजा करनी चाहिए क्योंकि ऐसा करने से आपके सारे कष्टों का निवारण हो जाएगा। यहां हम आपके लिए लाए हैं शनि देव (Shani Dev) की आरती, जिसको आपको शनिवार के दिन जरूर करनी चाहिए, ऐसा करने से जीवन के सारे विकारों का अंंत हो जाता है।

धर्मग्रंथो के अनुसार सूर्य की पत्नी संज्ञा की छाया के गर्भ से शनि देव का जन्म हुआ, जब शनि देव (Shani Dev)  छाया के गर्भ में थे तब छाया भगवान शंकर की भक्ति में इतनी ध्यान मग्न थी की उसने अपने खाने पिने तक शुध नहीं थी जिसका प्रभाव उसके पुत्र पर पड़ा और उसका वर्ण श्याम हो गया। शनि देव (Shani Dev) के श्यामवर्ण को देखकर सूर्य ने अपनी पत्नी छाया पर आरोप लगाया की ये मेरा पुत्र नहीं हैं। तभी से शनि देव (Shani Dev)  अपने पिता से शत्रु भाव रखते।

भारतीय ज्योतिष में नवग्रहों का विशेष महत्व है और इनमें से एक महत्वपूर्ण ग्रह है शनि देव। शनि देव को भारतीय ज्योतिष में कर्मफलदायी ग्रह माना जाता है। यह ग्रह भाग्यशाली और कर्मठ जीवन के प्रतीक है और व्यक्ति को धैर्य और संतुलन की प्राप्ति कराता है। शनि देव धर्म, न्याय और नियमों के प्रतीक माने जाते हैं।

शनि देव का संबंध शनिवार वार के साथ जोड़ा जाता है और इसी कारण इस दिन शनि देव की पूजा की जाती है। शनिवार को शनि देव की पूजा करने से व्यक्ति के जीवन में आने वाली मुसीबतों का निवारण होता है और सुख-शांति की प्राप्ति होती है।

 

Shani

Source – Pinterest

शनि देव की आरती

जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी।

सूर्य पुत्र प्रभु छाया महतारी॥

जय जय श्री शनि देव….

श्याम अंग वक्र-दृष्टि चतुर्भुजा धारी।

नी लाम्बर धार नाथ गज की असवारी॥

जय जय श्री शनि देव….

क्रीट मुकुट शीश राजित दिपत है लिलारी।

मुक्तन की माला गले शोभित बलिहारी॥

जय जय श्री शनि देव….

मोदक मिष्ठान पान चढ़त हैं सुपारी।

लोहा तिल तेल उड़द महिषी अति प्यारी॥

जय जय श्री शनि देव….

जय जय श्री शनि देव….

देव दनुज ऋषि मुनि सुमिरत नर नारी।

विश्वनाथ धरत ध्यान शरण हैं तुम्हारी॥

जय जय श्री शनि देव भक्तन हितकारी।।

जय जय श्री शनि देव….

Shani Dev Ki Aarti

Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitakari।

Suraj Ke Putra Prabhu Chhaya Mahatari॥

Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitakari॥

Shyam Ang Vakra-Drishti Chaturbhuja Dhaari।

Nilambar Dhaar Nath Gaj Ki Asawari॥

Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitakari॥

Kreet Mukut Shish Sahaj Dipat Hai Lilari।

Muktan Ki Maal Gale Shobhit Balihari॥

Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitakari॥

Modak Aur Mishthan Chade, Chadati Paan Supari।

Loha, Til, Tel, Udad Mahishi Hai Ati Pyari॥

Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitakari॥

Dev Danuj Rishi Muni Sumirat Nar Naari।

Vishvnath Dharat Dhyan Ham Hai Sharan Tumhari॥

Jai Jai Shri Shanidev Bhaktan Hitakari॥

Shani dev ki aarti

शनि देव की आरती

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